एक सुंदर जीवन जीने के लिए आपको क्या चाहिए..अंतर्दृष्टि !!

सांई और अन्तर दृष्टि

Saikya द्वारा लिखे गए ब्लॉग What you need to live a beautiful life..Insight!! का हिंदी रूपांतरण : अंतर्दृष्टि

मुझे याद है कि मेरे बड़े भाई अपनी नई डायरी में कुछ सकारात्मक बातें (quotes)  लिखते थे। उनमें से एक वाक्य मुझे इतना सटीक और अच्छा लगा कि मैंने इसे अपने दिमाग में कॉपी कर लिया..

“अच्छे कर्म करे,
सर्वशक्तिमान पर भरोसा रखें
और सुखी जीवन जिएं” 😇

मुझे इन शब्दों का सही अर्थ बहुत बाद में ज्ञात हुआ और ईमानदारी से कहूं तो आज भी हर दिन और अच्छे से अर्थ समझ आता रहता है।

बाबा ने जो शब्द सीख के रूप में कहे थे, उन्हे आप कई बार भूल सकते हैं..लेकिन जब भी वे चाहेंगे कि आप को उनकी सीख फिर से याद आए , वह अपनेआप आपके मन में घूमने लगेंगे।

तो, बाबा और आध्यात्मिकता के साथ मेरे अनुभव के अनुसार .. कुछ चीजें हैं जिन्हें आप अपने जीवन में बदल सकते हैं ताकि आप अपने जीवन को हर मायने में बेहतर बना सके।

साथ ही आप अपने रास्ते में आने वाली कई बाधाओं से बच सकते हैं।

●कुछ दान ..कुछ करुणा अन्य प्राणियों के साथ सांझा करना।

●सभी से सम्मानपूर्वक बात करना।

●जब भी आप कर सकते हैं लोगों की मदद करना।

●अपनी मान्यताओं और इरादों को साफ करना।
   उन्हें प्यार में बदलना।

●भगवान या गुरु के नाम का जाप करना, जब भी आप कर सकें।

●ध्यान करना

क्या नहीं करना चाहिए:


मैं एक किंडरगार्टन शिक्षक नहीं हूं जो आपको धोखा या झूठ या चोरी न करने के लिए कहे।😂
मुझे लगता है कि आप यह पहले से जानते हैं।😛

● चुगली करना या पीठ पीछे बुराई करना।

● हमेशा अपने या दूसरों के नकारात्मक पहलुओं पर ध्यान देना ।


● किसी को ठेस पहुँचाने के लिए अप्रत्यक्ष टिप्पणियों या चुटकुलों   का उपयोग करना।


● अत्यधिक उम्मीद करना।
(और भी बहुत कुछ)

और हकीकत है..

साईबाबा ने मुझे एहसास दिलाया कि “ऊपर लिखी गई हर चीज़ को जानना” और “इसे वास्तविक जीवन में लागू नहीं करना” कितना आम है।
हम कोशिश करते हैं लेकिन हम ऐसा नहीं कर पाते क्यों कि हमारा दिमाग अंतर्दृष्टि से विहीन एक मशीन के रूप में काम करता है

इसे पालन करने के लिए सरल नियमों की एक सूची की आवश्यकता है,जिसे हम इसे सौंप नहीं सकते।

तो, यह परेशान हो जाता है जब यह तय नहीं कर पाता कि क्या करना है..कैसे करना है।

हाँ यह कठिन है..जब तक आप ध्यान नहीं करते।

आप ध्यान के बारे में यहां पढ़ सकते है 👇

Meditation is a Necessity

आपको यह पता लगाने के लिए एक अंतर्दृष्टि की आवश्यकता है कि कब क्या करना है ..कैसे करना है?

लोगों से कतराना

उदाहरण के लिए,

ध्यान के बाद मैंने देखा..कि मैं कुछ लोगों के साथ बाहर जाने से बचती रहती हूं क्योंकि “उनके साथ बाहर जाने वाली संगीता मैं नहीं थी”।

मेरे कुछ भी करने, पहनने और बोलने पे उनकी राय और आलोचना के डर से मुझे लगा कि मैं उनके सामने अपने असली रूप में नहीं रह सकती।

इसलिए मैंने उनसे परहेज किया।

ध्यान से पहले, मैंने सोचा था कि वे बहुत अधिक आलोचनात्मक हैं इसलिए मैं नहीं जाना चाहती ।

लेकिन आप यहां देख सकते हैं कि “मेरा डर” मुझे छुपा रहा था, न कि उनकी “आलोचना”।

जब कोई मुझे वैसे ही स्वीकार नहीं करता जैसे मैं हूं तो मुझे डरने के लिए किसने कहा ??
..मेरे बचपन के अनुभवो ने।

लेकिन डरना क्यों ??
ताकि वो मेरी झूठी छवि को स्वीकार कर सकें।

मुझे स्वीकार करवाने की आवश्यकता क्यों है ??
उनका प्यार पाने के लिए।

क्या यह प्यार है?..अगर मैं उनके साथ रहने से बहुत डरती हूँ?
नहीं।

तो क्या कोई और रास्ता नहीं है ??
हाँ ! है ना।

अंतर्दृष्टि ने मुझे सिखाया .. मुझे परवाह नहीं करनी चाहिए कि वे मेरी आलोचना करते हैं या नहीं .. क्योंकि मैं निश्चित रूप से उन के आलोचनात्मक (judgemental) होने के लिए उनकी आलोचना कर रही हूं।
(क्या दुष्चक्र है😅)

अगर उन्होंने 5 साल पहले एक बार मेरे कपड़ों का मज़ाक उड़ाया था.. तो मैं इसे याद रखुंगी और उस तरह के कपड़े नहीं पहनूँगी जैसा मैंने किया था ताकि मैं जीवन भर उनके कटाक्ष से बच सकूं।

अब, यहाँ मेरे लिए सही तरीका होगा कि मैं उनके साथ बाहर जाऊँ ..इस बार फिर से वास्तविक रूप में(being original) और उन्हें बता दूँ कि उनके निर्णय मेरे लिए कब आक्रामक हो रहे हैं।

(यह कथन उस विशेष स्थिति में मेरी अंतर्दृष्टि है..यह किसी अन्य स्थिति के लिए आपके लिए अच्छा हो सकता है या नहीं भी हो सकता है। इसे अंतर्दृष्टि कहा जाता है..हर जगह एक ही अवधारणा से नहीं चिपकना ।)

लेकिन ध्यान के बाद .. उन कटाक्षों जैसा कुछ भी मुझे कुछ सेकंड से ज्यादा परेशान नहीं करता था।

खुद के दिल की आवाज सुने ❤️


हमेशा दूसरों की अंतर्दृष्टि पर निर्भर न रहें•••


आपको अपने जीवन में अंतर्दृष्टि की आवश्यकता है .. क्योंकि वही सही रूूप में आपका मार्गदर्शन कर सकती है।

और किसी और की अंतर्दृष्टि आपके लिए उतना अच्छा काम नहीं कर सकती।

मेरे कहने का मतलब है ..अगर मैं अपने फैसलों में हमेशा मार्गदर्शन करने के लिए किसी व्यक्ति की अंतर्दृष्टि पर निर्भर करती हूं ..  तो यह मुझे मजबूत नहीं बल्कि आश्रित बना देगा।

मेरे बचपन में..मेरी माँ मुझे चेतावनी देती थी कि मैं अपने किसी भी दोस्त को अपनी कॉपी घर ले जाने के लिए न दूं क्योंकि वे इसे खो सकते हैं और फिर मुझे इसका खामियाजा भुगतना पडेगा ।मेरी माँ मेरे लिए मुझसे ज्यादा डरी हुई रहती थी।

लेकिन मेरे अंदर की कोई आवाज हमेशा कहती थी, “बिना चीजें बांटे जिंदगी नहीं चलती।”

और मैंने उसी आवाज़ की सुनी ।

हालांकि मम्मी आंशिक रूप से सही थी क्योंकि मैंने अपनी नोटबुक दो बार खो दी थी लेकिन हर बार जादुई रूप से मै अपनी खोई नोटबुक फिर से पा लेती थी ।

(अब मुझे पता चला कि ऐसा करने वाले साईं ही थे 😍)

मेरी मम्मी की अंतर्दृष्टि शायद उनके लिए अच्छी थी लेकिन मेरे लिए नहीं।

वह मेरी माँ थी..फिर भी मैंने उस छोटी सी उम्र में (सिर्फ बाबा की वजह से) अपने फैसले खुद लिए।

जैसा कि मैंने महसूस किया कि बड़ों की हर बात हमारे ऊपर सही लागू नहीं होती।

कोई भी एकदम सही नहीं होता।

तो, आप और आप (साईं/आंतरिक आवाज) के अलावा कोई नहीं जान सकता कि आपके लिए सबसे अच्छा क्या है।

तो, यह कोई भी हो सकता है ..आपके माता-पिता या भाई-बहन या दोस्त या पति .. आप उनकी राय पूछ सकते हैं लेकिन  अपने लिए कुछ भी अपनी अंतर्दृष्टि ,अपने अंतर्ज्ञान से ही चुनें।

पूरा ब्रह्माण्ड आपको सुन रहा है

अंतर्दृष्टि आपको बताती है कि क्या करना है:

मैं एक बार उलझन में थी .. मुझे “आभा शुद्धिकरण (aura cleansing)” का अभ्यास जारी रखना चाहिए या नहीं।

मैंने इसे कोरोना महामारी में अपनी AURA की रक्षा के लिए शुरू किया था।

Aura cleansing techniques

और तभी मेरे पति वहां आए, मेरे सामने खड़े हो गए और बोले…

“आपको अपनी रक्षा करनी चाहिए..वहां बाहर बहुत सारी नकारात्मक शक्तियां घूम रही हैं।”

मैं दो मिनट तक उन्हे घूरती रही क्योकिं  उन्होंने मुझे उत्तर दे दिया था लेकिन भला उन्हें क्या पता था मेरे प्रश्न के बारे में ..😅

और फिर वह हंसने लगे और बोले “game of thrones (वेब सीरीज) का varys ऐसे ही करता था ना!..मुझे अभी एकदम से याद आया तो मैं उसकी नकल कर रहा था।”

तो .. इस तरह साईं उत्तर देते हैं और आपकी अंतर्दृष्टि आपको विश्वास दिलाएगी कि यह आप का ही उत्तर है।
अगर मेरी अंतर्दृष्टि सक्रिय नहीं होती तो मैं इसे आसानी से अनदेखा कर देती।

“ब्रह्मांड (साई) मुझे सुन रहा है और हमेशा मुझे जवाब देता है” की अंतर्दृष्टि ने मुझे यह विश्वास दिलाया।

हो सकता है कि आपकी अंतर्दृष्टि दूसरों के लिए काम न करे, इसलिए आप उन्हें जरूरत पड़ने पर सलाह दें और उन्हें स्वतंत्र रहने दें..यह जरूरी नहीं है कि वे हमेशा आपकी कही गई बातों का पालन करें।
जैसा कि अब आप जानते हैं कि यह उनके लिए हमेशा फायदेमंद नहीं होगा।

(क्योंकि उनकी अंतर्दृष्टि आपके लिए भी सर्वोत्तम नहीं हो सकती है)

हम सभी के व्यक्तित्व और चरित्र लक्षण अलग-अलग होते हैं..इसलिए हम एक ही तरह से काम या सोच नहीं सकते हैं।

यह अनूठी विशेषता हमें और अधिक जोड़ती है।

आपको कभी-कभी मेरी राय की आवश्यकता हो सकती है..और मुझे आपके शब्दों की भी जरूरत पड़ सकती है।

लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि आप हमेशा मुझे या मैं आपको जवाब के लिए ढूंढ़ती रहूँ ।

इसी तरह.. बिना अंतर्दृष्टि के आप “अच्छा करने” की ओर आकर्षित नहीं होंगे या आपको उसमें बहुत अधिक कठिनाइयाँ दिख सकती हैं।

चिंता करना अहंकार है।

चलो मैं आपको बताती हूं ..
जब मैंने अपने कमरे की छत पर बिस्किट रखना शुरू किया.. वहाँ कोई पक्षी खाने के लिए नहीं आया।
मैं निराश महसूस कर रही थी।

लेकिन फिर साईं की आवाज ने मुझसे कहा .. “अगर बाबा चाहते हैं कि आप खाना साझा करें ..तो वे ऐसा खुद करवाएंगे .. आपको चिंता करने की क्या ज़रूरत है ..
चिंता करना भी एक तरह का अहंकार है… क्योंकि इसका मतलब है कि आप मानते हैं कि आपको स्वयम् को सब कुछ करना है।

यदि आप सांई को कर्ता मानते हैं..तो फिर चिंता किस बात की, बस अपना कर्तव्य करते रहे।”

मैंने यह परेशानी भी साईं पर छोड़ दी।

बाबा ने मुझे रोज बिस्किट डालने के लिए प्रेरित किया.. कुछ दिन वो यूंही पड़े रहे। (किसी भी पक्षी ने नहीं खाए)

मैं प्रार्थना करती रही और वही सब दोहराती रही।

और फिर सिलसिला शुरू हुआ..पहले कुछ छोटे पक्षी आए..फिर एक गिलहरी और फिर दूसरी गिलहरी..फिर बड़े पक्षी और फिर रात में चूहे भी।😊

अंतर्दृष्टि आपको बताएगी कि परिणामों की अपेक्षा किए बिना अपनी कार्रवाई को कैसे जारी रखा जाए ..यह आपको धैर्य “सबुरी” सिखाएगी।

मेरे लिए मेरी अंतर्दृष्टि और कुछ नहीं बल्कि मेरे अंदर बाबा की आवाज है।

जितना अधिक आप बाबा पर ध्यान केंद्रित करेंगे और उनका अनुसरण करने का प्रयास करेंगे.. उतना ही आप इसे सुन पाएंगे।
जितना अधिक आप ध्यान करेंगे..उतना अधिक यह स्पष्ट होती जाएगी।

गलतियाँ अनिवार्य हैं:


मैं गलतियों से डरती थी..पता नहीं क्यों।

लेकिन अंतर्दृष्टि आने के बाद .. मैं देख सकती थी कि मुझे दुनिया द्वारा बहुत अधिक आंका गया है इसलिए मुझे गलतियाँ करने से डर लगता था।

तो..इसे कैसे बदलें?

अंतर्दृष्टि के बाद आप समस्या पर ध्यान केंद्रित नहीं करते..

ठीक है एक समस्या है..तो क्या!..पूरी दुनिया से सहानुभूति हासिल करने से या फटे हुए दूध पर रोने से मुझे कोई समाधान नहीं मिलेगा।

इसलिए अब मैं थोड़ा रोती हूं लेकिन ज्यादा सोचती हूं .. नकारात्मक नहीं .. भावनात्मक रूप से नहीं .. लेकिन अंतर्दृष्टि से।

मैं कल्पना करती हूं कि अपनी भावनाओं को एक तरफ रख दिया जैसे वह एक बच्चा है और मैं उसे एक कोने में बैठने के लिए कह रही हूं, जबकि मैं सोचती हूं कि ऐसा क्यों हुआ ..इस के पीछे संदेश क्या है ..?

मैं अपने मन की सारी आवाजें सुनती हूं और उन्हें लिखती हूं..अगर लिख ना सकू तो उन्हें अपने दिमाग में स्कैन करती हूं।

उदाहरण के लिए:

पिछले साल मैं बहुत अधिक अतीत के visions (visions of past) में उलझ गयी थी और मुझे अभी भी नहीं पता कि वे सच थे या सिर्फ मेरी कल्पना।

लेकिन इसने मुझे अपने परिवार और एक साईं भक्त के सामने मूर्ख करार कर दिया।

और मैं एक पूरा दिन रोयी लेकिन बाबा ने मुझे बताया कि मेरे रोने से उन्हें दर्द हो रहा था, इसलिए मैं रुकी और मैने इस अनुभव को अच्छे से देखने का साहस जुटाया।

ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि…

●इसने मेरे हमेशा सही होने के अहंकार को खत्म किया।

●इसने मुझे मेरे लोगो के सामने मेरी छवि एक मूर्ख जैसी बना दी ..इसलिए इसने लोगों से अस्वीकृति या अपमान के मेरे डर को कम कर दिया।

●मैं हमेशा लोगों को खुश करने वाली रही हूं इसलिए मेरी इस गलती ने मुझे और मजबूत बना दिया।

अब मेरा सवाल बन गया..

मुझे चिंता क्यों करनी चाहिए अगर वे सोचते हैं कि मैं मूर्ख हूं।

मैं एक मूर्ख हूँ तो चिंता क्यों करें..मैं इसे शालीनता से स्वीकार करती हूँ।🤭
बस बात यह है कि यह मेरा पूरा सच नहीं है।

हर कोई मूर्ख है और हर कोई अपनी गलतियों से सीखता है।

अंतर्दृष्टि के साथ आप सीखते हैं कि लोग आप को वही भावनाएं देते हैं .. जो वे अपने अंदर रखते हैं।

उन्हें मूर्ख की तरह दिखने का डर था इसलिए उन्होंने मुझे मेरी गलती के लिए आंका।

लेकिन मुझे मूर्ख समझने का उनका चरित्र भी संपूर्ण सच नहीं है।

तो..उनके लिए मेरे बारे में बातें करना ठीक है।

और यह मुझे बदलने का समय है…उन्हें नहीं।

यह मेरे बदलने का समय है ।

अध्यात्म दूसरों को नहीं “स्वयं” को बदलने पर केंद्रित है।

और अगर मैं खुद को बदलना चाहती हूं..मुझे इस बात की परवाह नहीं करनी चाहिए कि वे क्या सोच रहे थे..मुझे इस बात की परवाह होनी चाहिए कि मैं क्या सोच रही हूं

साईं ने मुझे जवाब दिया…”तुमने गलती की..और पछतावा भी..ठीक है?..लेकिन यह जरूरी था..अन्यथा मेरी आज्ञा के बिना तुम्हारी जिंदगी में यह नहीं होता।

अहंकार को कम करने के लिए और तुम्हे ये समझाने के लिए कि बीते समय(पिछले जन्म) के बारे में उत्सुकता रखना ठीक है पर उसी में डूब जाना ठीक नहीं ।

तुम यहां मेरे साथ हो इसलिए वर्तमान जीवन पर ध्यान दो।”


मैं उन लोगों को खुुद से अलग कर दििया करती थी जो मेरी गलतियों के लिए मुझे डांटते थे।

लेकिन इस बार मैं खुद को माफ कर सकी इसलिए मैं दूसरों को भी माफ कर सकी।
और मैंने उनसे बात करना जारी रखा..मैंने माफी माँगी ..और अपने व्यवहार में अपनी गलती को सुधारा।

हमेशा याद रखें जब आपके कंधे पर कोई फरिश्ता हो..आपके साथ जो कुछ भी होता है..उसकी अनुमति से होता है।
और वह वही करेगा जो आपके लिए जरूरी है..चाहे वह आपका अपमान हो या प्रशंसा।

मैंने स्वीकार किया कि यह आवश्यक था क्योंकि बाबा ने ऐसा होने दिया।

उस समय के बाद .. मुझे शायद ही कभी अपने किसी पहलू के लिए शर्मिंदगी होती है कि मैं कौन हूं .. मैंने क्या गलतियाँ कीं .. या मैं कैसी दिखती हूँ।

क्योंकि पूरी दुनिया लोगों की अस्वीकृति के डर में जी रही है..और इससे हमारा कोई भला नहीं हो रहा ।
मैं भाग्यशाली हूं कि बाबा ने अपनी लीला से इस डर को कम कर दिया।

इसलिए, कभी भी यह उम्मीद न करें कि आप कोई गलती नहीं करेंगे या कोई आप पर चिल्लाएगा नहीं।
अगर वे चिल्लाते हैं..इसे एक संदेश के रूप में देखें।

उन्हें बताएं कि आप कैसा महसूस करते हैं।

लेकिन जो उन्होंने किया उसे दोहराने की कोशिश न करें।

वे खुद नहीं जानते कि किस तरह वे अपने बचपन में अनजाने में सीखे व्यवहार को दोहरा रहे हैं।

लेकिन अगर आपको अंतर्दृष्टि मिली है .. इसके साथ जाएं, reflexive व्यवहार के साथ नहीं।

अंतर्दृष्टि आपको बताएगी कि किसकी बात सुननी है..किस सलाह का पालन करना है..किस को अस्वीकार करना है।

उसके बाद आप कुछ मिनटों से अधिक समय तक उदास या भ्रमित महसूस नहीं करेंगे।

आप अपनी भावनाओं को साहसपूर्वक स्वीकार करेंगे।
इसका मतलब यह नहीं है कि आपको उन चीजों के लिए पछतावा नहीं होगा जो आपको नहीं करनी चाहिए थी ..लेकिन आप सालों तक खुद को अपराधबोध की झील में नहीं डुबोएंगे। (मेरी तरह)

आप सम्मान और सच्चाई को अलग रखेंगे।

किसी को अपनी सच्चाई बताना अपमान नहीं है.. भले ही वे इसे सुनने के लिए तैयार न हों।
लेकिन सही शब्दों का प्रयोग करने की कोशिश करें। क्योंकि आप सिर्फ खुद को सही साबित करने के लिए, उनके प्यार की उपेक्षा नहीं करना चाहेंगे।

यहाँ बाबा ने जीने के लिए एक उद्धरण(quote) दिया है ..

लोगों की परवाह करें ना कि आपके लिए उनकी सोच की!

यह जीवन हमें बेहतर बनाने का एक प्रयोग है।

तो, प्रयोग करते रहें।

कुछ लोगों के पास जन्म से अंतर्दृष्टि हो सकती है, लेकिन जब हम बाहर की दुनिया में अलग-अलग अनुभव (कंडीशनिंग) करते हैं तो यह खो जाती है।

इसे बचाने के लिए..इसे विकसित करने के लिए..आपको ध्यान करने की जरूरत है।

और जिनके पास एक गुरु है (जो जानते हैं कि उनके पास एक गुरु है) उन्हें किसी बात की चिंता करने की आवश्यकता नहीं है..क्योंकि गुरु स्वयं ही आपकी अंतर्दृष्टि विकसित करते है , बस उन्हीं पर ध्यान केंद्रित करें.. उन्हें याद करते रहें.

आप साईं या अपनी अंतर्दृष्टि को कैसे सुनते हैं? मुझे जरूर बताएं।

आप अच्छे कर्मों के बारे में पोस्ट पर जा सकते हैं👉

Small deeds great impact

सदा दिव्य चरणों में रहे।

सांई सांई।🥰

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